जिलाधिकारी ने दिए गंगा एवं सहायक नदियों को प्रदूषणमुक्त बनाने के निर्देश
चमोली, 30 अक्टूबर 2026
*एंटी-लिटरिंग एवं एंटी-स्पिटिंग के तहत होगी चालानी कार्रवाई*
*गंगा एवं सहायक नदियों को प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए विभागों को दिए निर्देश*
अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश की अध्यक्षता में शुक्रवार को वीसी सभागार गोपेश्वर में जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद में गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के संरक्षण, सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन तथा नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में जनपद में संचालित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की स्थिति की समीक्षा करते हुए अपर जिलाधिकारी ने सभी एसटीपी का नियमित एवं प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने तथा उनकी प्रगति एवं संचालन संबंधी रिपोर्ट नियमित रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बताया गया कि जनपद में कुल 26 एसटीपी संचालित हैं, जिनमें 16 सरकारी एवं 10 निजी एसटीपी शामिल हैं। हेमकुंड साहिब क्षेत्र में एसटीपी के हस्तांतरण एवं भूमि हस्तांतरण से संबंधित प्रक्रिया की जानकारी लेते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को लंबित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन की समीक्षा के दौरान अपर जिलाधिकारी ने सभी नगर निकायों (यूएलबी) को सेप्टेज प्रबंधन के लिए आवश्यक वाहनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि सेप्टेज के सुरक्षित संग्रहण, परिवहन एवं वैज्ञानिक निस्तारण की समुचित व्यवस्था की जाए।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समीक्षा करते हुए उन्होंने सभी नगर निकायों में डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने तथा इसकी कवरेज बढ़ाने के निर्देश दिए। विशेष रूप से गंगा ग्रामों में घर-घर से कूड़ा एकत्रित करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
उन्होंने एंटी-लिटरिंग एवं एंटी-स्पिटिंग के तहत चालानी कार्रवाई बढ़ाने तथा सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फैलाने एवं गंदगी करने वालों के विरुद्ध सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि एंटी-लिटरिंग एवं एंटी-स्पिटिंग के तहत जनपद के 11 नगर निकायों में 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक कुल 242 चालान किए गए हैं।
अपर जिलाधिकारी ने ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बल्क वेस्ट जनरेटर (अधिक मात्रा में कचरा उत्पन्न करने वाले प्रतिष्ठानों एवं संस्थानों) की पहचान कर उनके द्वारा उत्पन्न कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि गंगा एवं उसकी सहायक नदियों को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाए रखने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें तथा स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन के कार्यों की नियमित निगरानी करें।
बैठक में अधिशासी अभियंता जल संस्थान श्री संजय कुमार, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अभिषेक गुप्ता, अधिशासी अभियंता जल निगम श्री राजेश सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

