वनाग्नि नियंत्रण / प्रबन्धन में जन-सहयोग हेतु अपील
बालाजी टाइम्स न्यूज देहरादून उत्तराखंड
उत्तराखण्ड एक पर्वतीय प्रदेश है, जिसका अधिकांश भू-भाग वनों से आच्छादित है। विषाल वन सम्पदा जहाँ एक ओर राज्य के लिए प्रकृति का वरदान है वहीं दूसरी तरफ यहाँ होने वाली वनाग्नि दुर्घटनाएँ मानव एवं पर्यावरण पर अत्यन्त प्रतिकूल प्रभाव डालती है। वन हमारे राज्य में लोगों की आजीविका का एक बड़ा सहारा है तथा इसकी रक्षा करना हम सभी का परम कर्तव्य एवं धर्म है। वन विभाग, उत्तराखण्ड के सभी विभागों के अधिकारियों/कर्मचारियों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, विभिन्न दलों के सदस्यों, कालेजों / स्कूलों के विद्यार्थियों एवं प्रबुद्ध जनता से विनम्र अनुरोध एवं अपील करता है कि वनाग्नि को फैलने से रोकने या वनाग्नि घटनाओं की स्थिति में निम्नानुसार अपना आवश्यक सहयोग प्रदान करने का कष्ट करें-
अपने घरों के आस-पास एवं रास्तों के किनारे ज्वलनशील पदार्थों चीड़-पिरुल, घास के लुटे आदि को
एकत्रित न करें/न इकट्ठा होने दें अथवा तुरन्त हटा दें।
समस्त ग्राम प्रधान / सरपंच/ग्रामवासी/अध्यापक, विद्यार्थी वनाग्नि से होने वाले दुष्प्रभाव एवं वनाग्नि
रोकने के उपायों के संबंध में अपने ग्राम/विद्यालय स्तर पर आवश्यक बैठकें कराकर विचार-विमर्श करें।
वनों के निकटस्थ स्थानों पर खुले होटलों/बाबे/मोबाइल वैनों एवं दुकान संचालकों से अनुरोध है कि किसी भी दशा में ज्वलनशील पदार्थ न तो वनों में फेंकें और न ही अपने ग्राहकों को फेंकने दें।
बनाग्नि की घटना देखते ही निकटतम वनाग्नि शू-स्टेशन पर तत्काल सूचित करें तथा वनाग्नि घटना होने पर आग बुझाने हेतु वन विभाग के कर्मियों को अपना आवश्यक सहयोग प्रदान करें।
अपने घरों के आस-पास या खेतों में कूड़ा करकट / आड़ा अपनी उपस्थिति में प्रातःकाल ही जलायें। अग्नि अच्छी तरह बुझाने के उपरान्त ही उस स्थान से प्रस्थान करें।
सार्वजनिक परिवहन के चालकों/परिचालकों से अनुरोध है कि वनों के निकटस्थ वाहनों को रोकने पर समस्त यात्रियों को सूचित कर दें कि किसी भी दशा में जलती हुई बीड़ी, सिगरेट या माचिस की तीली बनों में न फेंकें।
अराजक तत्वों के द्वारा वनों में आग लगाने की स्थिति में इसकी सूचना तथा उनकी वीडियों/फोटोग्राफ्स आदि वन विभाग के निकटतम क्रू स्टेशन / हैल्प लाईन नं०/ Whatsapp No. पर सूचित करें। आपकी पहचान गुप्त रखी जायेगी।
वनाग्नि के मुख्य कारण चीड़-पिरूल को न्यून करने एवं स्थानीय ग्रामीणों को आजीविका से जोड़ने के लिए उत्तराखण्ड शासन द्वारा पिरूल की दर रू0 10 प्रति किग्रा० निर्धारित की गयी है, जिसे यन विभाग द्वारा स्थापित चीड़-पिरूल संग्रहण केन्द्रों पर एकत्रित किया जा सकता है।
चीड़-पिरूल का उपयोग पैलेट्स / ब्रिकेट्स / क्राफ्ट्स आदि में किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य
अन्तर्गत 09 पैलेट्स/ब्रिकेट्स यूनिटें स्थापित हैं।
यदि किसी वन क्षेत्र में आग दिखाई दे तो तुरन्त इसकी सूचना निकटतम वन चौकी/वन रेंज कार्यालय/अग्नि क्र-स्टेशन अथवा हैल्पलाईन नं० 1926 पर दें। इसके अतिरिक्त फॉरेस्ट फायर उत्तराखण्ड मोबाईल एप पर भी सूचना दी जा सकती है।
हम सभी की जिम्मेदारी है कि वनों को आग से बचायें ताकि ये आने वाली पीड़ियों के लिए सुरक्षित रह सकें। यदि हम सब मिलकर सतर्कता बरतेंगे तो वनाग्नि की घटनाओं को रोका जा सकता है। आपका सहयोग जीवनदायिनी यनों की रक्षा में महत्वपूर्ण है।
