रविवार राष्ट्रपति के रूप में रामनाथ कोविंद का आखिरी संदेश, बोले- अपने बच्चों के लिए बचाएं धरती
रविवार राष्ट्रपति के रूप में रामनाथ कोविंद का आखिरी संदेश, बोले- अपने बच्चों के लिए बचाएं धरती
दिल्ली।निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को राष्ट्र को संबोधित किया। कोविंद ने कहा कि 5 साल पहले मैं आपके चुने हुए जनप्रतिनिधियों के माध्यम से राष्ट्रपति चुना गया था। राष्ट्रपति के रूप में मेरा कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
राष्ट्रपति ने भारत के संविधान को प्रकाश स्तंभ बताते हुए बाबा साहब आंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि सामाजिक लोकतंत्र के बिना राजनीतिक लोकतंत्र नहीं टिक सकता। राष्ट्रपति कोविन्द ने रविवार की मध्यरात्रि को अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले शाम को राष्ट्र के नाम अपने विदाई संदेश में कहा कि जलवायु परिवर्तन का संकट हमारी धरती के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।
रामनाथ कोविंद ने कहा कि हमें अपने बच्चों की खातिर अपने पर्यावरण,अपनी जमीन, हवा और पानी का संरक्षण करना है। अपनी दिनचर्या में और रोजमर्रा की चीजों का इस्तेमाल करते समय हमें अपने पेड़ों, नदियों, समुद्रों और पहाड़ों के साथ-साथ अन्य सभी जीव-जंतुओं की रक्षा के लिए बहुत सावधान रहने की जरूरत है। प्रथम नागरिक के रूप में यदि देशवासियों को कोई एक सलाह देनी हो तो मैं यही सलाह दूंगा।
राष्ट्रपति रामनाथ ने अपना आखिरी विदाई संबोधन देते जलवायु परिवर्तन के गहराते संकट के मद्देनजर प्रकृति संरक्षण के लिए सभी नागरिकों से अपनी भूमिका निभाने का आहान किया। वहीं भारतीय लोकतंत्र की ताकत को बेमिसाल करार देते हुए कहा कि यह हमारे लोकतंत्र की जीवंतता ही है कि उनके जैसा साधारण पृष्ठभूमि का व्यक्ति देश के शीर्ष संवैधानिक पद तक पहुंच सकता है।
