देहरादून वन प्रभाग ने वन्यजीव सप्ताह-2026 के अवसर पर आशारोड़ी रेंज में साइकिल रैली का किया आयोजन
देहरादून । वन्यजीव सप्ताह-2026 के अवसर पर देहरादून वन प्रभाग द्वारा वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने तथा आमजन, युवाओं एवं साइकिलिंग समुदाय को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से प्रभागीय वनाधिकारी, देहरादून वन प्रभाग वैभव कुमार सिंह के निर्देशानुसार उप प्रभागीय। वनाधिकारी अभिषेक मैठाणी की अगुवाई में आशारोड़ी रेंज के अंतर्गत साइकिल रैली का आयोजन किया गया।
साइकिल रैली का शुभारंभ आशारोड़ी रेंज कार्यालय से किया गया। रैली विल्सन मोटर मार्ग होते हुए कड़वापानी वन विश्राम गृह तक पहुंची, जहां कार्यक्रम का समापन किया गया। इस अवसर पर पहाड़ी पैडलर एवं RIMC के साइकिलिस्टों सहित लगभग 100 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
रैली का उद्देश्य साइकिलिंग को प्रोत्साहित करना एवं प्रतिभागियों को वन-वन्य जीवों, जैव विविधता एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना था। रैली के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि वन केवल वृक्षों का समूह नहीं हैं, बल्कि विभिन्न प्रकार के वनस्पति एवं जीव-जंतुओं के लिए महत्वपूर्ण आवास हैं। स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र जल संरक्षण, जलवायु संतुलन, मृदा संरक्षण तथा मानव एवं वन्यजीव दोनों के लिए आवश्यक पर्यावरणीय सेवाएं प्रदान करते हैं।

इस अवसर पर उप प्रभागीय वनाधिकारी श्री अभिषेक मैठाणी द्वारा प्रतिभागियों को वन्यजीव सप्ताह-2026 की थीम “Connecting Habitats. Thriving Wildlife” के बारे में जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को समझाया गया कि वन्यजीवों के सुरक्षित संरक्षण के लिए केवल संरक्षित क्षेत्रों का संरक्षण पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके बीच मौजूद वन क्षेत्रों, कॉरिडोर एवं अन्य प्राकृतिक आवासों का संरक्षण भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। रैली के दौरान प्रतिभागियों को मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम एवं वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील व्यवहार के संबंध में भी जागरूक किया गया। विशेष रूप से वन क्षेत्रों में अनावश्यक शोर न करने, कूड़ा-कचरा न फैलाने, प्लास्टिक का उपयोग कम करने तथा वन्यजीवों को परेशान अथवा उनके निकट जाने से बचने की अपील की गई।
कार्यक्रम के दौरान देहरादून वन प्रभाग की QRT सदस्य श्री सुदर्शन द्वारा प्रतिभागियों को क्षेत्र में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के सर्पों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। सांपों की पहचान, उनके पारिस्थितिक महत्व तथा सर्प दिखाई देने की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम के माध्यम से सपों के सुरक्षित रेस्क्यू एवं उनके प्राकृ तिक आवास में छोडे जाने की प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई। प्रतिभागियों से अपील की गई कि सांप अथवा अन्य वन्यजीव दिखाई देने पर स्वयं पकड़ने अथवा नुकसान पहुंचाने के बजाय वन विभाग रेस्क्यू टीम को 1926 के माध्यम से सूचना दें।
कार्यक्रम में पहाड़ी पैडलर के श्री गजेंद्र रमोला द्वारा प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा गया कि साइकिलिंग स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल गतिविधि है। साइकिल से यात्रा करने पर ईंधन की खपत एवं वायु प्रदूषण कम होता है और प्रकृति के साथ लोगों का जुड़ाव बढ़ता है। वन मार्ग पर साइकिल चलाने के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रकृति को नजदीक से अनुभव करने तथा उसके संरक्षण की आवश्यकता को समझने का अवसर प्राप्त होता है।
वन क्षेत्राधिकारी आशा रोडी, रेंज श्री मोहनसिंह रावत ने कहा कि वन एवं वन्यजीवों का संरक्षण में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे स्वयं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक रहें तथा अपने परिवार, मित्रों एवं समाज के अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
प्रभागीय वनाधिकारी देहरादून वैभव कुमार सिंह ने कहा कि जिस प्रकार साइकिल की चेन की एक छोटी-सी कड़ी निकल जाए तो पूरी साइकिल रुक जाती है। उसी तरह प्रकृति की खाद्य श्रृंखला की एक कड़ी कमजोर होती है तो पूरा इकोसिस्टम प्रभावित होता है इसीलिए प्रत्येक वन्य जीव पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है। उनके द्वारा अवगत कराया गया कि देहरादून की साइक्लिंग कम्युनिटी एवं पर्यावरण प्रेमियों के लिए विभिन्न क्षेत्रों में संभावित मार्गों को चिह्नित करते हुए साइकल / एडवेंचर ट्रैक खोले जाने पर विचार किया जा रहा है।

