वन विभाग द्वारा साल वनों में कीट का प्रकोप रोकने के लिए किए जा रहे महत्वपूर्ण उपाय
देखता । देहरादून एवं कालसी क्षेत्र के साल वनों में हॉप्लो (Hoplocerambyx spinicornis) कीट का प्रकोप एक ज्ञात एवं ऐतिहासिक वन-स्वास्थ्य समस्या है। स्वीकृत कार्ययोजना में कालसी क्षेत्र में हॉप्लो के प्रकोप का उल्लेख वर्ष 1934-35 से विभिन्न अवसरों पर मिलता है तथा इसके नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक एवं सिल्वीकल्चरल उपाय निर्धारित किए गए हैं।
होप्लो का प्रकोप केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहा है। Indian Journal of Entomology में प्रकाशित उपलब्ध वैज्ञानिक साहित्य के अनुसार देश के विभिन्न साल वन क्षेत्रों में समय-समय पर इसके व्यापक प्रकोप दर्ज किए गए हैं। उत्तराखंड में देहरादून क्षेत्र में 1916-1924, तिमली में 1958-1960, तथा थानो में 1964 एवं 1965 में प्रकोप दर्ज किया गया है। मध्य प्रदेश के मंडला, बालाघाट आदि तथा वर्तमान छत्तीसगढ़ के बिलासपुर एवं राजनांदगांव क्षेत्रों में भी विभिन्न अवधियों में बड़े पैमाने पर साल बोरर के प्रकोप दर्ज किए गए हैं। यह ऐतिहासिक अभिलेख दर्शाते हैं कि साल बोरर का प्रकोप एक आवधिक एवं बहु-क्षेत्रीय वन-स्वास्थ्य समस्या है।

होप्लो का लार्वा साल वृक्ष के तने एवं हृदयकाष्ठ को क्षति पहुंचाता है तथा अनियंत्रित प्रकोप की स्थिति में इसके विस्तार की संभावना रहती है। इसलिए इसके नियंत्रण में समयबद्ध निगरानी, प्रभावित वृक्षों की पहचान, Trap Tree Operation तथा वयस्क कीटों को पकड़कर नष्ट करना जैसी वैज्ञानिक एवं यांत्रिक विधियां अपनाई जाती हैं। ये उपाय स्वीकृत कार्ययोजना में भी निर्धारित हैं।
वर्तमान प्रकोप के नियंत्रण हेतु भारत सरकार से प्राप्त आवश्यक अनुमतियों के अनुरूप कार्यवाही की जा रही है। अब तक देहरादून एवं कालसी क्षेत्रों में लगभग 3.96 लाख होप्लो बीटल पकड़े एवं नष्ट किए जा चुके हैं, जो क्षेत्र में चलाए जा रहे व्यापक निगरानी एवं नियंत्रण अभियान को दर्शाता है।
प्रकोप की प्रभावी एवं सतत निगरानी के लिए Dedicated Task Force का गठन किया गया है, जिसमें वन विभाग, उत्तराखंड वन विकास निगम तथा Forest Research Institute (FRI), देहरादून के विशेषज्ञों के समन्वय से कार्य किया जा रहा है। Task Force द्वारा नियमित Field monitoring, नियंत्रण कार्यों की समीक्षा तथा वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, होप्लो के प्रकोप के कारणों, इसके प्रसार को प्रभावित करने वाले कारकों तथा दीर्घकालीन एवं अधिक प्रभावी नियंत्रण उपायों के वैज्ञानिक अध्ययन हेतु FRI, देहरादून के सहयोग से शोध परियोजना तैयार की जा रही है।
वन विभाग का उद्देश्य प्रभावित साल वनों की सुरक्षा, होप्लो के प्रकोप को नियंत्रित करना तथा इसके संभावित प्रसार को रोकते हुए साल वन पारिस्थितिकी तंत्र को स्वस्थ बनाए रखना है। पूरी कार्रवाई स्वीकृत कार्ययोजना, निर्धारित वैज्ञानिक प्रोटोकॉल तथा विशेषज्ञ संस्थानों की तकनीकी सलाह के अनुरूप की जा रही है।
