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उत्तराखंड की भाजपा सरकार में आसान नहीं है इस बार मंत्री बनना

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उत्तराखंड की भाजपा सरकार में आसान नहीं है इस बार मंत्री बनना, जानिए अलाकमान के किस फार्मूले पर बैठना होगा फिट

देहरादून। भाजपा की नई सरकार में मंत्री पद को लेकर एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति हो रखी है। हर दूसरा विधायक मंत्री बनने की इच्छा पाले हुए है। मंत्री बनने की चाहत रखने वाले विधायक दिल्ली दौड़ लगा रहे हैं। विधायकों द्वारा अपने करीबी आलानेताओं की परिक्रमा शुरू हो गई है। पिछली सरकार में मंत्री रहे सभी विधायक मंत्री पद के प्रबल दावेदारों में से है। कोई लगातार विधानसभा चुनाव जीतते हुए आ रहा है तो कोई प्रचंड वोटों से जीकर आया है, कई तो ऐसे हैं जो हर सरकार में मंत्री रहते हैं। आलाकमान के सोशल इंजीनियरिंग और क्षेत्रीय-जातीय समीकरणों की कसौटी पर फिट होने वाले विधायकों की मंत्री बनने की चाहत पूरी हो पायेगी। भाजपा के हलकों में यह चर्चा गर्म है कि केंद्रीय नेतृत्व कैबिनेट गठन के मामले में चौंका भी सकता है। गुजरात फार्मूले की भी चर्चाएं जोरों पर हैं।

जातीय और क्षेत्रीय संतुलन की कसौटी
सरकार गठन पर मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले चेहरों को जातीय व क्षेत्रीय समीकरणों की कसौटी पर परखा जाता है। मिसाल के तौर पर 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद बनी भाजपा सरकार में पांच ब्राह्मण, पांच ठाकुर और दो अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े विधायकों को स्थान दिया गया। इसके साथ ही जिन जिलों में पार्टी को अधिक सीटें मिलती है, स्वाभाविक रूप से उनके खाते में मंत्री पद और अहम मंत्रालय जाने की संभावनाएं भी रहती हैं।

अनुभव, वरिष्ठता, निष्ठा भी आधार
अनुभव, वरिष्ठता और निष्ठा भी कैबिनेट में जगह बनाने का एक प्रमुख आधार माना जाता है। यह आम धारणा है कि वरिष्ठ विधायक को पार्टी कैबिनेट में जगह देती है, लेकिन क्षेत्रीय, जातीय या सोशल इंजीनियर का फैक्टर आड़े आने पर वरिष्ठ विधायक की राह मुश्किल भी हो जाती है। वरिष्ठ विधायक हरबंस कपूर इसके उदाहरण रहे हैं।

कैबिनेट में महिलाओं का प्रतिनिधित्व
कैबिनेट में महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व देने की परंपरा रही है। पिछली चार सरकारों में कम से कम एक महिला विधायक मंत्री रहीं। पूर्व कांग्रेस सरकार में डॉ. इंदिरा हृदयेश और अमृता रावत को भी मंत्री बनाया जा चुका है।

कई दिग्गज विधायक कतार में
भाजपा में कई दिग्गज विधायक कतार में हैं। इनमें से कुछ उत्तराखंड गठन के बाद से जीत का पंच तो कुछ जीत का चौका लगा चुके हैं। इनमें बिशन सिंह चुफाल, बंशीधर भगत, प्रेमचंद अग्रवाल, मदन कौशिक, गणेश जोशी, चंदन राम दास, सहदेव पुंडीर के नाम प्रमुख हैं। जिन्होंने दो व तीन बार चुनाव जीता है, पार्टी के ऐसे विधायकों की भी लंबी सूची है।

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