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नशा मुक्त युवा एवं व्यशन मुक्त समाज ही विकसित भारत का निर्माण कर सकेगा- ललित जोशी

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देहरादून । कम्बाइंड इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च कुंआवाला देहरादून में भारतीय शिक्षण मंडल युवा आयाम उत्तराखण्ड प्रान्त की ओर से प्रान्त स्तरीय शोधार्थी सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में अखिल भारतीय अधिकारी भारतीय शिक्षण मंडल के संयुक्त महामंत्री पंकज नाफडे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सम्मेलन का आयोजन भारतीय शिक्षण मंडल उत्तराखण्ड प्रान्त के प्रान्तीय अध्यक्ष उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ओ. पी. एस. नेगी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इस दौरान सह प्रांत मंत्री डॉ. तरूण, युवा आयाम प्रमुख संदीप गौतम, विस्तारक दया शंकर मिश्रा, सह युवा आयाम प्रमुख अनन्या, प्रकाशन प्रमुख अभिषेक शर्मा, सदस्य प्रो. के. एस. रावत भी उपस्थित रहे।

भारतीय शिक्षण मंडल का प्रान्त स्तरीय शोधार्थी सम्मेलन एक ऐसा आयोजन है, जिसमें विभिन्न शोधार्थियों को अपने शोध कार्यों को प्रस्तुत करने और उनके विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान किया जाता है। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारतीय शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देना है। इसमें शिक्षा के विभिन्न पहलुओं, संस्कृति, विज्ञान, और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की जाती है। यह सम्मेलन शोधकर्ताओं को एक मंच प्रदान करता है जहाँ वे भारतीय दृष्टिकोण से अपने अध्ययन और खोजों को साझा कर सकते हैं।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेज के चेयरमैन एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने अपने संस्थान में सम्मेलन के आयोजन के लिए भारतीय शिक्षण मंडल का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न शोधार्थियों द्वारा किए गए शोध विकसित भारत बनाने में नई दिशा प्रदान करेंगे। आज का यह कार्यक्रम युवाओं को एक नई दिशा देगा, युवाओं को शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों, दया-करूणा जैसे भावों को आत्मसात करना होगा और यह तभी संभव होगा जब हम व्यसन मुक्त रहेंगे। क्योंकि आज हर अपराध की जड़ नशा है, और हमारे युवाओं को इस अपराध की जड़ को खत्म करने का संकल्प लेना होगा।

मुख्य अतिथि अखिल भारतीय अधिकारी भारतीय शिक्षण मंडल के संयुक्त महामंत्री पंकज नाफडे ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए शिक्षा के भारतीय मॉडल को अपनाने और इसे आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की बात करते हुए भारतीय शिक्षा के मूल्यों और संस्कृति को उजागर करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा पद्धति में हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, नैतिकता और अध्यात्मिकता को शामिल करना चाहिए ताकि शिक्षा केवल जानकारी प्राप्त करने का माध्यम न रहे, बल्कि एक समग्र और संतुलित व्यक्तित्व के निर्माण का साधन बने। पंकज नाफडे ने यह भी कहा कि शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को भारतीय दृष्टिकोण से अनुसंधान करने की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके और समाज के समग्र विकास में योगदान दिया जा सके।

कार्यक्रम में विभिन्न शोधार्थियों ने अपना प्रस्तुतिकरण दिया। इस दौरान भारतीय शिक्षण मंडल युवा आयाम द्वारा आयोजित शोधपत्र लेखन प्रतियोगिता विजन फॉर विकसित भारत के शोधार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।कार्यक्रम में लगभग 300 छात्र छात्राओं ने प्रतिभाग किया।

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