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बाल दिवस पर धाद ने शुरू किया एक चिट्ठी लिखिए अभियान

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बाल दिवस पर धाद ने शुरू किया एक चिट्ठी लिखिए अभियान
प्रदेश के 500 से ज्यादा स्कूलों में छात्र लिखेंगे पुस्तक सहयोगियों को पत्र

देहरादून बाल दिवस पर धाद ने स्कूलों में एक चिट्ठी लिखिए अभियान प्रारम्भ किया। अभियान का शुभारम्भ साहित्यकार डॉक्टर विद्या सिंह, धाद के सचिव तन्मय ममगाईं, कोना कक्षा का के संयोजक गणेश चन्द्र उनियाल, और कार्यालय सचिव आशा डोभाल की उपस्थिति में हुआ। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज कॉलेज अजबपुर में पत्र लेखन प्रतिभाग मे स्कूल के बच्चों ने हिस्सेदारी की इस अवसर पर पांच श्रेष्ठ चिट्ठियों के लिए दीपांशी, ज्योति, प्रीती रिंकी और मनीषा को पुरुस्कृत किया गया.


अभियान का परिचय देते हुए धाद के सचिव तन्मय ममगाईं ने कहा कि धाद गत चार साल से आम समाज के सहयोग से प्रदेश के स्कूलों में किताबों के कोने स्थापित करने का अभियान चला रही है इस बार बाल दिवस पर छात्रों को उन सभी सहयोगियों को आभार करने और जो किताबों में पढ़ा है उसे अभिव्यक्त करने के लिए एक चिट्ठी लिखिए अभियान प्रारम्भ किया गया है जो 14 नवम्बर से 28 नवम्बर तक आयोजित होगा। कार्यकर्म में प्राप्त श्रेष्ठ चिट्ठियों को पुरष्कृत किया जाएगा। उन्होंने कहा की देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने पत्र लेखन की एक श्रेष्ठ परम्परा डाली थी जब उन्होने जेल से अपनी पुत्री को भारत के सरोकरों पर ढेरों पत्र लिखे। उनके जन्मदिवस पर इस सन्दर्भ को लेते हुए बच्चों के लिए एक चिट्ठी लिखिए कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया है। धाद के सार्वजानिक शिक्षा में समाज के रचनात्मक योगदान के कार्यक्रम कोना कक्षा का के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में साहित्यकार विद्या सिंह ने स्कूल में किताबों का कोना स्थापित किया जिसमे स्कूल को हिमालय की कहानियां,गुल्ली का गजब पिटारा, पांचवीं कहां है, पहला घर , आनंद, सतरंगी गेंद पुस्तकों के साथ चम्पक पत्रिका का वार्षिक सब्सक्रिशन भेंट किया गया
कोना कक्षा का का परिचय देते हुए संयोजक गणेश उनियाल ने बताया कि पूर्णतः समाज के सहयोग से चलने वाले इस कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक प्रदेश के स्कूलों में 550 से अधिक कोने विभिन्न विद्यालयों में स्थापित किये जा चुके हैं जिसमें आम समाज के लोग अपने गाँव और निकटवर्ती स्कूलों में रचनात्मक योगदान कर रहे हैं
इस अवसर पर छात्रों को सम्बोधित करते हुए कोना सहयोगी डॉ विद्या सिंह ने कहा कि छात्रों में संवेदनशीलता उत्पन्न करना शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए। मात्र धन कमाना और अपना जीवन स्तर ऊपर उठाना ही नहीं अपितु अपने समाज के लिए, अपने परिवेश के लिए हम किस तरह उपयोगी साबित हो सकते हैं, इसकी समझ पैदा करना भी मैं शिक्षा का दायित्व समझती हूं। अध्यवसाय शिक्षा का एक प्रमुख अंग है अतः छात्रों में अध्ययनशीलता विकसित करना बहुत आवश्यक है।
विद्यालय की प्रधानचार्य नर्वदा राणा ने सभी बच्चों को गतिविधियों में भाग लेने के लिए अपील की आयोजन का संचालन आशा डोभाल ने किया इस अवसर पर मनोहर लाल, दयानद डोभाल, शुभम शर्मा और स्कूल के शिक्षक और छात्रायें उपस्थित थे।

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