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जानिए पितृ पक्ष श्राद्ध करने का समय एवम तिथि

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तिथि

पूर्णिमा श्राद्ध10/09/2022शनिवार
प्रतिपदा ॥ 11/09/2022रविवार
(1:15PMसे पहले इसके बाद द्वितीया तिथि लग जायेगी )
द्वितीयाश्राद्ध12/09/2022सोमवार
(11:36AM से पहले इसके बाद तृतीय तिथि लग जायेगी)
तृतीया श्राद्ध 13/092022मंगलवार
(10:38AMसे पहले इसके बाद चतुर्थ तिथि लग जायेगी )
चतुर्थ श्राद्ध 14/092022बुद्धवार
(10:26AM से पहले इसके बाद पंचमी तिथि लग जायेगी)
पंचमी श्राद्ध 15/09/2022गुरूवार
(11:01AMसे पहले इसके बाद षष्ठी तिथि लग जायेगी )
षष्ठी श्राद्ध 16/09/2022शुक्रवार
(12:20PMसे पहले इसके बाद सप्तमी तिथि लग जायेगी)
सप्तमी श्राद्ध17/09/2022शनिवार
(2:15PM तक)
अष्टमी श्राद्ध 18/09/2022रविवार
नवमीश्राद्ध 19/09/2022सोमवार
दशमी श्राद्ध20/09/2022मंगलवार एकादशीश्राद्ध21/09/2022बुद्ध॥
द्वादशी श्राद्ध 22/09/2022गुरूवार
त्रयोदशीश्राद्ध23/09/2022शुक्र ॥
चतुर्दशी श्राद्ध 24/09/2022शनि॥
अमावस्या श्राद्ध25/09/2022रवि
पितृ-विसर्जन सूर्य अस्त के बाद

पितृ पक्ष का आरंभ -10 सितंबर से हो रहा है और यह 25 सितंबर तक चलेगा. हिंदू पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष का आरंभ भाद्रपद मास की पूर्णिमा से होता है और समापन आश्विन मास की अमावस्या पर होता है. इस अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या कहा जाता है. इसके अगले दिन से नवरात्र का आरंभ हो जाता है.

पितृ पक्ष महत्व 

हिंदू धार्मिक शास्त्र के अनुसार 16 दिनों तक चलने वाला यह पितृ पक्ष पूरी तरह से हमारे पितरों को समर्पित होता है. इस दौरान हम उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, पूजा, आदि करते हैं. इस दौरान विशेष तौर पर कौवों को भोजन कराया जाता है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि कौवों के माध्यम से भोजन पितरों तक पहुंच जाता है. इसके अलावा बहुत से लोग ऐसा भी मानते हैं कि पितृपक्ष में हमारे पितृ ही कौवों के रूप में पृथ्वी पर आते हैं इसीलिए इस दौरान भूल से भी इस दौरान उनका अनादर नहीं करना चाहिए और उन्हें हमेशा ताज़े बने भोजन का पहला हिस्सा देना चाहिए.

सबसे पहले साफ जल, बैठने का आसन, थाली, कच्चा दूध, गुलाब के फूल, फूल की माला, कुशा, सुपारी, जौ, काले तिल, जनेऊ आदि अपने पास रखें. आचमन के बाद हाथ धोकर अपने ऊपर जल छिड़के, फिर गायत्री मंत्र से शिखा बांधकर तिलक लगा लें. फिर थाली में जल, कच्चा दूध, गुलाब की पंखुड़ी डाले, फिर हाथ में चावल लेकर देवताओें को याद करें. ध्यान रहें कि तर्पण विधि के लिए पूर्व की तरफ मुख करके ही बैठना है. कुशा को पूर्व की ओर रखें. फिर श्राद्ध के दौरान अनामिका उंगली में कुशा घास से बनी अंगूठी धारण करें. फिर सीधे हाथ से तर्पण दें. पितरों को अग्नि में गाय का दूध, दही, घी या खीर अर्पित करें. ब्राह्मण भोजन निकलने से पहले गाय, कुत्ते, कौवे के लिए खाना निकाल लें. दक्षिण की तरफ मुख करके और कुश, तिल और जल लेकर पितृतीर्थ से संकल्प करें और एक या फिर तीन ब्राह्मण को भोजन कराएं. तर्पण करने के बाद ही ब्राह्मण को भोजन ग्रहण कराएं और भोजन के बाद दक्षिणा और अन्य सामान दान करें और ब्राह्मण का आशीर्वाद प्राप्त करें.

उपरोक्त श्राद्धों का विवरण तिथियों के समयानुसा दिया गया है द्वितीया तिथि से लेकर षष्ठी तिथि तक तारीक के अनुसार तिथि कम हैं अपनी सुविधानुसार तिथियों का चयन कर लेवे जिससे तिथि मे पित्तरों का श्राद्ध हो सके ।

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