चार धाम यात्रा 2026 उत्तराखंड

अब तक 5,23,582 श्रद्धालुओं ने किए बाबा केदारनाथ के दर्शन

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22 दिनों में 5.23 लाख श्रद्धालुओं ने किए बाबा केदार के दर्शन बेहतर व्यवस्थाओं से श्रद्धालुओं में उत्साह, प्रशासन की हो रही सराहना

उत्तराखंड । विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम की यात्रा इस वर्ष नए आयाम स्थापित कर रही है। 22 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा अब 22वें दिन में प्रवेश कर चुकी है और अब तक 5,23,582 श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं। यात्रा के शुरुआती चरण से ही श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या धाम पहुंच रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, उत्साह और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन के बावजूद यात्रा व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारु बनी हुई हैं। यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन लगातार सक्रिय है। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा स्वयं यात्रा व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और यात्रा संचालन पर निरंतर नजर बनाए हुए हैं।

*यात्रा मार्ग से धाम तक व्यापक इंतजाम, सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष फोकस*

जिला प्रशासन द्वारा यात्रा मार्ग से लेकर धाम परिसर तक व्यापक और सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। पैदल यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं के लिए विश्राम स्थल, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए हैं। वहीं धाम क्षेत्र में स्वच्छता, आवास व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन टीमों और अन्य संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों से यात्रा को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाया जा रहा है। बेहतर व्यवस्थाओं का ही परिणाम है कि देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु जिला प्रशासन और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली की खुलकर सराहना कर रहे हैं।


पंजाब के रोपड़ से आए श्रद्धालु दिवाकर ने कहा, “प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाएं बेहद उत्कृष्ट हैं। बाबा केदारनाथ के दर्शन अत्यंत सहजता से हुए। धाम में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है और प्रशासन की टीमें हर समय सहायता के लिए उपलब्ध हैं।”
अहमदाबाद से आई माही ने कहा, “धाम पहुंचकर अत्यंत सुखद अनुभव हुआ। यहां की व्यवस्थाएं हमारी अपेक्षाओं से कहीं बेहतर हैं। जिला प्रशासन का हम हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।”
वहीं अहमदाबाद से आए कुणाल चावला ने कहा, “इतनी ऊंचाई और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद जिस स्तर की व्यवस्थाएं की गई हैं, वह वास्तव में काबिले-तारीफ हैं।

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