जनगणना ड्यूटी पर रार, शिक्षक आर-पार के मूड में
10 दिन कार्यमुक्ति या आदेश वापसी, संयुक्त मोर्चा का अल्टीमेटम
डबल ड्यूटी के खिलाफ शिक्षक एकजुट, संघर्ष तेज करने की चेतावनी
देहरादून 27 अप्रैल 2026 विद्यालय समय के उपरांत शिक्षकों पर जनगणना कार्य थोपे जाने के आदेश को लेकर दून में विवाद गहराता जा रहा है। संयुक्त मोर्चा ने इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई का एलान करते हुए साफ अल्टीमेटम दिया है कि या तो शिक्षकों को कम से कम 10 दिन के लिए पूर्णतः कार्यमुक्त किया जाए या फिर जनगणना ड्यूटी की बाध्यता तुरंत समाप्त की जाए।
सोमवार को संयुक्त मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल दिनभर सक्रिय रहा। प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले एडीएम केके मिश्रा से भेंट कर शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं और बढ़ते कार्यभार को रखा गया। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा हालात में शिक्षक एक साथ शिक्षण कार्य और जनगणना जैसे बड़े दायित्व को निभाने में असमर्थ हैं। इसके बाद नगर निगम पहुंचकर नगर आयुक्त नमामी बंसल को ज्ञापन सौंपा गया और महापौर सौरभ थपलियाल से भी आदेश पर पुनर्विचार की मांग की गई। इसके बाद जनगणना निदेशक ईवा श्रीवास्तव से हुई वार्ता में भी शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से रखा गया। अधिकारियों ने उनकी बातों को ध्यान से सुना और सकारात्मक समाधान का भरोसा दिया। मोर्चा को उम्मीद है कि देर शाम तक इस संबंध में कोई ठोस निर्णय सामने आ सकता है। संयुक्त मोर्चा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह जनगणना जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि शिक्षकों पर डाले जा रहे असंतुलित और अव्यावहारिक कार्यभार का विरोध है। शिक्षकों का सम्मान, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इस बीच मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद ढौंडियाल से भी मुलाकात कर जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षकों को एकतरफा कार्यमुक्त करने और समय-सारिणी में बदलाव की मांग की गई।

इस दौरान राजकीय शिक्षक संघ देहरादून के जिलाध्यक्ष सुभाष झल्डियाल, जिलामंत्री अर्जुन पंवार, प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष धर्मेंद्र रावत, एमएनओपीएस के अध्यक्ष अनुराग चौहान, कालसी ब्लाक अध्यक्ष नवीन पुंडीर, सहसपुर ब्लाक अध्यक्ष कमल किशोर मिश्रा, विकासनगर ब्लाक अध्यक्ष सुधीर कांति, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के अध्यक्ष सूरज मंद्रवाल, दिनेश भट्ट, अंकित डोबरियाल और अश्वनी कुमार भट्ट सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। यह शिक्षक सम्मान की लड़ाई है और समाधान तक संघर्ष जारी रहेगा।
