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पहाड़ प्रेमी डॉ एसडी जोशी और विचार एक नई सोच संस्था की ”स्वस्थ घर-स्वस्थ उत्तराखंड” मुहिम जारी, ग्वालदम के निकट चौंडा गाँव में लगाया निशुल्क हैल्थ कैंप

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पहाड़ प्रेमी डॉ एसडी जोशी और विचार एक नई सोच संस्था की ”स्वस्थ घर-स्वस्थ उत्तराखंड” मुहिम जारी, ग्वालदम के निकट चौंडा गाँव में लगाया निशुल्क हैल्थ कैंप

देहरादून। पहाड़ प्रेमी डॉ एसडी जोशी और विचार एक नई सोच संस्था की ”स्वस्थ घर-स्वस्थ उत्तराखंड” मुहिम लगातार जारी है। इसी कड़ी में विचार एक नई सोच संस्था के सहयोग से चमोली के ग्वालदम के निकट चौंडा गाँव में फ्री मेडिकल हैल्थ कैम्प का आयोजन किया गया। कैंप में ख्याति प्राप्त दून मेडिकल कॉलेज के पूर्व वरिष्ठ फिजिशियन व कार्डियोलॉजिस्ट डॉ एसडी जोशी, वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ एलएम सुनद्रियाल नेे शिरकत कर मरीजों की जांच की। इस मौके पर व्यवस्थायें बनाने के लिए ग्रामीण जनप्रतिनिधियों के अलावा विचार एक नई सोच संस्था के संचालक राकेश बिजल्वाण मौजूद रहे। वही डॉ एसडी जोशी की टीम से कपिल थापा, सुशील कुमार, विक्रम सिंह, महावीर फ़र्सवाण मौजूद रहे।

285 से अधिक मरीजों की स्वास्थ्य जांच
चमोली के ग्वालदम के निकट चौंडा गाँव में स्वास्थ्य कैम्प का आयोजन किया गया। चौंडा गाँव में लगाए गए फ्री मेडिकल हैल्थ कैम्प में 285 से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। स्वास्थ्य शिविर में स्थानीय महिलाओं व पुरुषों को विभिन्न परेशानियों से सम्बन्धित उपचार एवं महत्वपूर्ण परामर्श दिया गया। हृदय रोग से संबधित मरीजों का मौके पर फ्री ईसीजी व शुगर के रोगियों की निशुल्क शुगर जाँच की गई। इस दौरान वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ एलएम सुनद्रियाल नेे 90 से अधिक मरीज़ों की आँखों की जाँच की और उन्हें जरूरी सलाहें दी। डॉ एसडी जोशी ने कहा कि जनपद में आने वाले समय में इस तरह के और भी स्वास्थ्य शिविर के लगाए जायेंगे। ग्रामीणों ने कहा डॉ एसडी जोशी किसी देवदूत से कम नहीं हैं। उत्तराखंड में वह एकमात्र डॉक्टर हैं जो निस्वार्थ भाव से पर्वतीय क्षेत्रों दुर्गम गांव-गांव जाकर मरीजों का निशुल्क ईलाज कर रहे हैं। इसके साथ ही तमाम बीमारियों को लेकर आम जनता को जागरूक कर रहे हैं।

डॉ एसडी जोशी और राकेश बिजल्वाण बने जरूरतमंदों के लिए देवदूत
विचार एक नई सोच संस्था के बैनर तले शुरू हुआ डॉ एसडी जोशी का ”स्वस्थ घर-स्वस्थ उत्तराखंड“ निशुल्क हैल्थ कैंप अभियान आज जरूरतमंद लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है। डॉ जोशी के इस काम में समाजसेवी राकेश बिजल्वाण कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ निभा रहे हैं। राज्य के पर्वतीय जनपदों में दोनों की जोड़ी घर-घर जाकर लोगों को स्वास्थ्य को लेकर जागरूक करने का काम कर रही है। आर्थिक अभावों में जो लोग अपना और अपनों का ईलाज नहीं करा पाते हैं ऐसे मरीजों को जब उनके गांव उनके घर में निशुल्क हैल्थ कैंप लगाकर देखने डॉ जोशी पहुंचते हैं तो मरीज का आधा रोग पहले ही दूर हो जाता है। राकेश बिजल्वाण डॉ जोशी के सारथी की भूमिका में नजर आते हैं। मरीजों को डॉ जोशी के निर्देशानुसार निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराते हैं। इसके साथ ही कई प्रकार की जांचें भी निशुल्क की जाती है। डॉ जोशी का कहना है कि उनका फोकस पर्वतीय जिलों के हर दुर्गम गांवों में जाकर निशुल्क हैल्थ कैंप लगाने का है। उनको सुकून मिलता है जब वह जरूरतमंद लोगों के बीच पहुंचते हैं और उनकी बीमारियों का इलाज कर पाते हैं। उनका यह अभियान लगातार जारी रहेगा। पुरस्कार पाकर और बेहत्तर करने की प्रेरणा मिलती है। अगर आपके काम का आकलन लोग कर रहे हैं तो आपकी मेहनत सफल हो जाती है। समाजसेवी राकेश बिजल्वाण ने कहा डॉ जोशी उनके प्रेरणासोत्र हैं। उनकी संस्था और वह डॉ जोशी के साथ सारथी की भूमिका में है। इस अभियान में अब लोग जुड़ने लगे हैं। राज्य के बिभिन्न गांवों से निशुल्क हैल्थ कैंप लगाने के लिए लोग लगातार मांग कर रहे हैं। हमारा भी प्रयास है कि हम राज्य के हर गांव में कैंप लगा सकें।

जन-जागरूकता से होगा ”स्वस्थ घर-स्वस्थ उत्तराखंड”
निशुल्क स्वास्थ्य शिविर में पहुंचे लोगों ने कहा कि पहाड़ की बेहतरी में राकेश बिजल्वाण के कुशल नेतृत्व में विचार एक नई सोच संस्था खामोशी से अपना योगदान दे रही हैं। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो निस्वार्थ भाव से समाजसेवा में लगे रहते हैं। डॉक्टर जोशी ने कहा कि पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिये सरकार के साथ-साथ हम सभी डॉक्टरों को अपने स्तर से प्रयास करने होंगे। चमोली, पौड़ी और उत्तरकाशी, टिहरी जिले के अधिकांश गांवों में विचार एक नई सोच संस्था के साथ मिलकर फ्री कैंप आयोजित किये गये हैं। उन्होंने कहा कि वह लोग जो महंगी दवाईयां नहीं खरीद सकते, जांचें नहीं करा सकते, उन्हें ऐसे शिविरों से लाभ मिलता है। डॉ एसडी जोशी ने कहा कि वह समय-समय पर पहाड़ों में जनता के लिये निशुल्क सेवाएं देते रहेंगे। डॉ जोशी ने स्वास्थ्य जांच को आये लोगों से कहा कि बीमारियों को छिपायें नहीं डॉक्टर को बतायें।

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