उत्तराखंड देहरादून रायपुर के घाटों पर छठ पूजा की तैयारी में जुटे श्रद्धालू
बालाजी टाइम्स न्यूज देहरादून।आज यानी 19 नवंबर 2023 को छठ महापर्व का तीसरा दिन है। आज के दिन संध्या अर्घ्य यानी डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. चार दिवसीय छठ पर्व में तीसरा दिन सबसे खास होता है. इस दिन लोग अपने परिवार के साथ घाट पर जाते हैं और कमर तक पानी में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं।

लोक आस्था का महापर्व छठ देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व हर वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है। शास्त्रों में निहित है कि यह व्रत पूजन त्रेता युग में सर्वप्रथम माता सीता ने की थी। उस समय से हर वर्ष कार्तिक माह में छठ पूजा मनाई जाती है। चार दिवसीय छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय से होती है और कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को उगते सूर्य देव को अर्घ्य देने के साथ समाप्त होती है। आइए, इस पूजा के बारे में सबकुछ जानते हैं-
छठ पूजा का तीसरा दिन आज
राजधानी देहरादून के तमाम घाटों में छठ पूजा को लेकर होने लगी विशेष तैयारी तमाम घाटों में महिलाओं के आने का सिलसिला हुआ शुरू छठ पूजा के तीसरे दिन महिलाएं रखती है उपवास जिसके बाद शाम के समय डूबते सूर्य को दिया जाता है अर्ज्ञ शाम का समय डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए है समर्पित छठ पूजा के तीसरे दिन की पूजा का हैं विशेष महत्व है।

वेदी पूजन बनाने जुटे
छठ महापर्व समिति ने बताया कि अनेक श्रद्धालुओं ने रविवार को रायपुर तट पर पूजन के लिए वेदी का निर्माण पूरा कर लिया है। थोड़ी-थोड़ी दूर पर 200 से अधिक वेदियां बनाई जा चुकी है। अर्घ्य देने के लिए 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। छठ पूजा की रात्रि में रायपुर मालदेवता तट के किनारे ही टेंट, तंबू लगाकर ठहरने की व्यवस्था की गई है।

आज अस्त होते सूर्य को अर्घ्य
छठ पर्व के तीसरे दिन रविवार को महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखकर भक्तिभाव में रमकर शाम को नदी, तालाब के किनारे विधिवत पूजन करेंगी। पूजा करके अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देंगी। सारी रात भजन-कीर्तन करेंगी। रायपुर घाट में रातभर सांस्कृतिक कार्यक्रम और लोकगीतों की प्रस्तुति से भक्तिभाव छाएगा।

खरना के दिन सूर्यास्त के बाद व्रती स्नान-ध्यान करती हैं। इसके बाद एकांत में छठी मैया की पूजा करती हैं। पूजा में गन्ने के रस और चावल से खीर और रोटी बनाई जाती है। फल-फूल से छठी मैया की पूजा की जाती है। इस समय व्रती खरना का प्रसाद ग्रहण करती हैं। उसके बाद घर के सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करते हैं।

20 को उगते सूर्य को अर्घ्य से समापन
छठ पर्व के चौथे दिन सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में महिलाएं नदी-तालाब में डुबकी लगाकर पुन: पूजन करके सूर्य के उदय होने का इंतजार करेंगी। जैसे ही सूर्य की लालिमा फैलने लगेगी, सूर्यदेव को अर्घ्य देने का सिलसिला प्रारंभ होगा। साथ ही छठी मइया को विविध फल, सब्जियों से अर्घ्य दिया जाएगा। इसके पश्चात ठेकुआ का प्रसाद ग्रहण करके लगभग 36 घंटे से चल रहे निर्जला व्रत का पारणा किया जाएगा।

आतिशबाजी और भंडारा
छठ पर्व के अंतिम दिन सुबह अर्घ्य देते ही आतिशबाजी की जाएगी। हजार से अधिक श्रद्धालुओं को भोजन कराया जाएगा। प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।
