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देहरादून डोईवाला टेंडर होने के बावजूद भी सुनसान पड़े निगम के लॉट

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देहरादून डोईवाला

अनिल कुमार- ग्राम प्रधान प्रतिनिधि

खनन की माया भी बड़ी अजीब है, कहीं अवैध खनन से सरकार के खजाने को चूना लगाया जा रहा तो, कहीं सरकार के अधिकारियों की लापरवाही से राजस्व को नुकसान हो रहा है।

उत्तराखंड की आये के स्रोतों में शामिल खनिज उठान आये का एक बड़ा स्रोत माना जाता है, पर जब अधिकारियों की लेट लतीफी की वजह से खनन चुगान समय पर न हो सके तो, उत्तराखण्ड को राजस्व की प्राप्ति कहां से होगी। और इसका जीता जागता उदाहरण रानीपोखरी व भोगपुर में खुलने वाले वन विकास निगम के लोटों पर देख सकते हैं।


उत्तराखंड में खनन निकासी के लिए कुछ नदियों की जिम्मेदारी वन विकास निगम को शोंपी गयी है, पर वन विकास निगम व खनन विभाग की लापरवाही आमजन पर भारी पड़ रही है। और जनता प्राइवेट स्थानों से मंहगे दामो पर खनन सामग्री खरीदने को मज़बूर है।
पर उत्तराखण्ड में अफसर शाही पूरी तरह हावी है, और मनमर्जी से सरकार की आये के साधनों को लेट लतीफी के जरिये ठिकाने लगाए जाने का काम किया जा रहा है।
बता दें कि बीती 3 नवम्बर को वन विकास निगम द्वारा रानीपोखरी में कांटे की टेंडर प्रक्रिया संम्पन्न कर ली गयी थी, पर अभी तक निगम में निकासी का कार्य शुरू नही किया गया है। जो कि निगम की बड़ी लापरवाही बतायी जा रही है। ओर आमजन मंहगे दामो पर खनन सामग्री खरीदने को मजबूर है, साथ ही सरकार की आये को भी चुना लग रहा है।

अनिल कुमार- ग्राम प्रधान प्रतिनिधि

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